[स्लाइड 1] (Background: White) अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ (Font Size: 40) 1.1 भूमिका * कक्षा 9 में, आपने वास्तविक संख्याओं की खोज प्रारंभ की और इस प्रक्रिया से आपको अपरिमेय संख्याओं को जानने का अवसर मिला। * इस अध्याय में, हम वास्तविक संख्याओं के बारे में अपनी चर्चा जारी रखेंगे। * यह चर्चा हम धनात्मक पूर्णांकों के अति महत्वपूर्ण गुणों से प्रारंभ करेंगे। * ये गुण हैं: यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म (Euclid's division algorithm) और अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)। [स्लाइड 2] (Background: White) 1.1 भूमिका (जारी...) (Font Size: 40) * यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म पूर्णांकों की विभाज्यता से संबंधित है। * साधारण भाषा में कहा जाए, तो इसके अनुसार, एक धनात्मक पूर्णांक a को किसी अन्य धनात्मक पूर्णांक b से इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है कि शेषफल r प्राप्त हो, जो b से छोटा है। * आप में से अधिकतर लोग शायद इसे सामान्य लंबी विभाजन प्रक्रिया (long division process) के रूप में जानते हैं। * यद्यपि यह परिणाम कहने और समझने में बहुत सरल है, परंतु पूर्णांकों की विभाज्यता के गुणों से संबंधित इसके अनेक अनुप्रयोग हैं। * हम मुख्यतः इसका प्रयोग दो धनात्मक पूर्णांकों का महत्तम समापवर्तक (HCF) परिकलित करने में करेंगे। [स्लाइड 3] (Background: White) 1.1 भूमिका (जारी...) (Font Size: 40) * दूसरी ओर, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय का संबंध धनात्मक पूर्णांकों के गुणन से है। * प्रत्येक भाज्य संख्या (Composite number) को एक अद्वितीय रूप से अभाज्य संख्याओं (prime numbers) के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। * यही महत्वपूर्ण तथ्य अंकगणित की आधारभूत प्रमेय है। * यह परिणाम कहने और समझने में बहुत सरल है, परंतु इसके गणित के क्षेत्र में बहुत व्यापक और सार्थक अनुप्रयोग हैं। [स्लाइड 4] (Background: White) अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुप्रयोग (Font Size: 40) यहाँ, हम अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के दो मुख्य अनुप्रयोग देखेंगे: * हम इसका प्रयोग कक्षा IX में अध्ययन की गई कुछ संख्याओं, जैसे \sqrt{2}, \sqrt{3} और \sqrt{5} आदि की अपरिमेयता सिद्ध करने में करेंगे। * दूसरे, हम इसका प्रयोग यह खोजने में करेंगे कि किसी परिमेय संख्या, मान लीजिए \frac{p}{q} (q \neq 0), का दशमलव प्रसार कब सांत (terminating) होता है तथा कब असांत आवर्ती (non-terminating repeating) होता है। * ऐसा हम \frac{p}{q} के हर q के अभाज्य गुणनखंडन को देखकर ज्ञात करते हैं। * आप देखेंगे कि q के अभाज्य गुणनखंडन से \frac{p}{q} के दशमलव प्रसार की प्रकृति का पूर्णतया पता लग जाएगा। [स्लाइड 5] (Background: White) 1.2 अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Font Size: 40) * आप पिछली कक्षाओं में देख चुके हैं कि किसी भी प्राकृत संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के एक गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है। * उदाहरणार्थ, 2=2, 4=2\times2, 253=11\times23, इत्यादि। * अब, आइए यह देखें कि क्या अभाज्य संख्याओं को गुणा करके, एक प्राकृत संख्या प्राप्त की जा सकती है। * आइए इसकी जाँच करें। * कुछ अभाज्य संख्याओं, मान लीजिए 2, 3, 7, 11 और 23 का कोई संग्रह लीजिए। * यदि हम इन संख्याओं में से कुछ या सभी संख्याओं को इस प्रकार गुणा करें कि इन संख्याओं की हम जितनी बार चाहें पुनरावृत्ति कर सकते हैं, तो हम धनात्मक पूर्णांकों का एक बड़ा संग्रह बना सकते हैं। [स्लाइड 6] (Background: White) अभाज्य संख्याओं का संयोजन (Font Size: 40) * आइए इनमें से कुछ की सूची बनाएँ: * * * * * 2^2\times3\times7\times11\times23=21252 इत्यादि। * मान लीजिए कि आपके संग्रह में, सभी संभव अभाज्य संख्याएँ सम्मिलित हैं। * वास्तव में, अभाज्य संख्याएँ अपरिमित रूप से अनेक हैं। इसलिए, यदि हम इन अभाज्य संख्याओं को सभी संभव प्रकारों से संयोजित करें तो हमें सभी अभाज्य संख्याओं और अभाज्य संख्याओं के सभी संभव गुणनफलों का एक अनंत संग्रह प्राप्त होगा। * क्या हम इस प्रकार से सभी भाज्य संख्याएँ प्राप्त कर सकते हैं? [स्लाइड 7] (Background: White) गुणनखंड वृक्ष (Factor Tree) (Font Size: 40) * क्या कोई ऐसी भाज्य संख्या हो सकती है जो अभाज्य संख्याओं की घातों का गुणनफल न हो? * इसका उत्तर देने से पहले, आइए धनात्मक पूर्णांकों के गुणनखंडन करें। हम एक गुणनखंड वृक्ष (factor tree) का प्रयोग करेंगे। (यहाँ एक स्पष्ट गुणनखंड वृक्ष का चित्र लगाएँ) * 32760 को 2 से भाग देने पर 16380 * 16380 को 2 से भाग देने पर 8190 * 8190 को 2 से भाग देने पर 4095 * 4095 को 3 से भाग देने पर 1365 * 1365 को 3 से भाग देने पर 455 * 455 को 5 से भाग देने पर 91 * 91 को 7 से भाग देने पर 13 (जो कि एक अभाज्य संख्या है)। [स्लाइड 8] (Background: White) गुणनखंड वृक्ष से निष्कर्ष (Font Size: 40) * इस प्रकार, हमने 32760 को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में गुणनखंडित कर लिया है। * * अर्थात् 32760 = 2^3 \times 3^2 \times 5 \times 7 \times 13, जो अभाज्य संख्याओं की घातों के रूप में हैं। * एक अन्य संख्या, मान लीजिए 123456789 लेकर उसके गुणनखंड लिखें। इसे 3^2 \times 3803 \times 3607 के रूप में लिखा जा सकता है। * इससे हमें यह अनुमान (conjecture) प्राप्त होता है कि प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं की घातों के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है। * वास्तव में, यह कथन सत्य है तथा पूर्णांकों के अध्ययन में यह मूलरूप से एक अति महत्वपूर्ण स्थान रखता है। [स्लाइड 9] (Background: White) प्रमेय 1.1 (अंकगणित की आधारभूत प्रमेय) (Font Size: 40) * इसी कारण यह कथन अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) कहलाता है। * प्रमेय 1.1: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है तथा यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है। * इस प्रमेय का संभवतया सर्वप्रथम वर्णन यूक्लिड के एलीमेंट्स की पुस्तक IX में हुआ था। * परंतु इसकी सबसे पहले सही उपपत्ति कार्ल फ्रेड्रिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) ने अपनी कृति डिसक्वीशंस अरिथिमेटिकी में दी। [स्लाइड 10] (Background: White) अद्वितीयता (Uniqueness) का अर्थ (Font Size: 40) * यह प्रमेय कहती है कि एक दी हुई भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में, बिना यह ध्यान दिए कि अभाज्य संख्याएँ किस क्रम में आ रही हैं, एक अद्वितीय प्रकार (Unique way) से गुणनखंडित किया जा सकता है। * अर्थात् यदि कोई भाज्य संख्या दी हुई है, तो उसे अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखने की केवल एक ही विधि है। * उदाहरणार्थ, हम 2\times3\times5\times7 को वही मानते हैं जो 3\times5\times7\times2 को माना जाता है। * "एक प्राकृत संख्या का अभाज्य गुणनखंडन, उसके गुणनखंडों के क्रम को छोड़ते हुए अद्वितीय होता है।" [स्लाइड 11] (Background: White) व्यापक रूप (General Form) (Font Size: 40) * व्यापक रूप में, जब हमें एक भाज्य संख्या x दी हुई हो, तो हम उसे x = p_1 p_2 ... p_n के रूप में गुणनखंडित करते हैं, जहाँ p_1, p_2, ..., p_n इत्यादि आरोही क्रम में लिखी अभाज्य संख्याएँ हैं। * अर्थात् p_1 \le p_2 \le ... \le p_n है। * यदि हम समान अभाज्य संख्याओं को एक साथ मिला लें, तो हमें अभाज्य संख्याओं की घातें (powers) प्राप्त हो जाती हैं। * उदाहरणार्थ: 32760 = 2^3 \times 3^2 \times 5 \times 7 \times 13 * एक बार यह निर्णय लेने के बाद कि गुणनखंडों का क्रम आरोही होगा तो दी हुई संख्या के अभाज्य गुणनखंड अद्वितीय होंगे। [स्लाइड 12] (Background: White) उदाहरण 1 (Font Size: 40) प्रश्न: संख्याओं 4^n पर विचार कीजिए, जहाँ n एक प्राकृत संख्या है। जाँच कीजिए कि क्या n का कोई ऐसा मान है, जिसके लिए 4^n अंक शून्य (0) पर समाप्त होता है। हल: * यदि किसी n के लिए, संख्या 4^n शून्य पर समाप्त होगी तो वह 5 से विभाज्य होगी। * अर्थात् 4^n के अभाज्य गुणनखंडन में अभाज्य संख्या 5 आनी चाहिए। * यह संभव नहीं है क्योंकि 4^n = (2)^{2n} है। * इसी कारण, 4^n के गुणनखंडन में केवल अभाज्य संख्या 2 ही आ सकती है। * अंकगणित की आधारभूत प्रमेय की अद्वितीयता हमें यह निश्चित कराती है कि 4^n के गुणनखंडन में 2 के अतिरिक्त और कोई अभाज्य गुणनखंड नहीं है। * इसलिए ऐसी कोई संख्या n नहीं है, जिसके लिए 4^n अंक 0 पर समाप्त होगी। [स्लाइड 13] (Background: White) HCF और LCM ज्ञात करना (Font Size: 40) * आप पढ़ चुके हैं कि दो धनात्मक पूर्णांकों के HCF और LCM अंकगणित की आधारभूत प्रमेय का प्रयोग करके किस प्रकार ज्ञात किए जाते हैं। * इस विधि को अभाज्य गुणनखंडन विधि (prime factorisation method) भी कहते हैं। उदाहरण 2: संख्याओं 6 और 20 के अभाज्य गुणनखंडन विधि से HCF और LCM ज्ञात कीजिए। हल: * यहाँ 6 = 2^1 \times 3^1 * और 20 = 2 \times 2 \times 5 = 2^2 \times 5^1 है। [स्लाइड 14] (Background: White) उदाहरण 2 (जारी...) (Font Size: 40) * HCF (6, 20) = 2 * LCM (6, 20) = 2 \times 2 \times 3 \times 5 = 60 ध्यान दीजिए कि: * HCF (6, 20) = 2^1 = संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल * LCM (6, 20) = 2^2 \times 3^1 \times 5^1 = संख्याओं में संबद्ध प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल [स्लाइड 15] (Background: White) HCF और LCM का महत्वपूर्ण गुण (Font Size: 40) * उपरोक्त उदाहरण से आपने यह देख लिया होगा कि HCF(6, 20) \times LCM(6, 20) = 6 \times 20 है। * वास्तव में, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय का प्रयोग करके हम इसकी जाँच कर सकते हैं कि किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए: * HCF(a, b) \times LCM(a, b) = a \times b होता है। * इस परिणाम का प्रयोग करके, हम दो धनात्मक पूर्णांकों का LCM ज्ञात कर सकते हैं, यदि हमने उनका HCF पहले ही ज्ञात कर लिया है। [स्लाइड 16] (Background: White) उदाहरण 3 (Font Size: 40) प्रश्न: अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा 96 और 404 का HCF ज्ञात कीजिए और फिर इनका LCM ज्ञात कीजिए। हल: 96 और 404 के अभाज्य गुणनखंडन से हमें प्राप्त होता है कि: * * इसलिए, इन दोनों पूर्णांकों का HCF = 2^2 = 4 साथ ही, सूत्र का प्रयोग करने पर: * LCM(96, 404) = \frac{96 \times 404}{HCF(96, 404)} = \frac{96 \times 404}{4} = 9696 [स्लाइड 17] (Background: White) उदाहरण 4 (Font Size: 40) प्रश्न: संख्या 6, 72 और 120 का अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा HCF और LCM ज्ञात कीजिए। हल: हमें प्राप्त है: * * * 2^1 और 3^1 प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घातें हैं। अतः, HCF(6, 72, 120) = 2^1 \times 3^1 = 2 \times 3 = 6 [स्लाइड 18] (Background: White) उदाहरण 4 (जारी...) (Font Size: 40) 2^3, 3^2 और 5^1 प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घातें हैं, जो तीनों संख्याओं से संबद्ध हैं। अतः, LCM(6, 72, 120) = 2^3 \times 3^2 \times 5^1 = 360 टिप्पणी: * ध्यान दीजिए कि 6 \times 72 \times 120 \neq HCF(6, 72, 120) \times LCM(6, 72, 120) * अर्थात्, तीन संख्याओं का गुणनफल उनके HCF और LCM के गुणनफल के बराबर नहीं होता है। [स्लाइड 19] (Background: White) प्रश्नावली 1.1 (Font Size: 40) * निम्नलिखित संख्याओं को अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में व्यक्त कीजिए: (i) 140 (ii) 156 (iii) 3825 (iv) 5005 (v) 7429 * पूर्णांकों के निम्नलिखित युग्मों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए तथा इसकी जाँच कीजिए कि दो संख्याओं का गुणनफल = HCF × LCM है: (i) 26 और 91 (ii) 510 और 92 (iii) 336 और 54 * अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा निम्नलिखित पूर्णांकों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए: (i) 12, 15 और 21 (ii) 17, 23 और 29 (iii) 8, 9 और 25 [स्लाइड 20] (Background: White) प्रश्नावली 1.1 (जारी...) (Font Size: 40) 4. HCF (306, 657) = 9 दिया है। LCM (306, 657) ज्ञात कीजिए। * जाँच कीजिए कि क्या किसी प्राकृत संख्या n के लिए, संख्या 6^n अंक 0 पर समाप्त हो सकती है। * व्याख्या कीजिए कि 7 \times 11 \times 13 + 13 और 7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1 + 5 भाज्य संख्याएँ क्यों हैं। * किसी खेल के मैदान के चारों ओर एक वृत्ताकार पथ है। इस मैदान का एक चक्कर लगाने में सोनिया को 18 मिनट लगते हैं, जबकि इसी मैदान का एक चक्कर लगाने में रवि को 12 मिनट लगते हैं। मान लीजिए वे दोनों एक ही स्थान और एक ही समय पर चलना प्रारंभ करके एक ही दिशा में चलते हैं। कितने समय बाद वे पुनः प्रांरभिक स्थान पर मिलेंगे? [स्लाइड 21] (Background: White) 1.3 अपरिमेय संख्याओं का पुनर्भ्रमण (Font Size: 40) * कक्षा IX में, आपने देखा कि किस प्रकार परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ मिलकर वास्तविक संख्याएँ (real numbers) बनाती हैं। * तथापि हमने यह सिद्ध नहीं किया था कि ये संख्याएँ अपरिमेय हैं। * इस अनुच्छेद में, हम यह सिद्ध करेंगे कि \sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5} तथा, व्यापक रूप में, \sqrt{p} अपरिमेय संख्याएँ हैं, जहाँ p एक अभाज्य संख्या है। * अपनी उपपत्ति में, हम जिन प्रमेयों का प्रयोग करेंगे उनमें से एक है अंकगणित की आधारभूत प्रमेय। [स्लाइड 22] (Background: White) अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) (Font Size: 40) * याद कीजिए कि एक संख्या 's' अपरिमेय संख्या कहलाती है, यदि उसे \frac{p}{q} के रूप में नहीं लिखा जा सकता हो, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q \neq 0 है। * अपरिमेय संख्याओं के कुछ उदाहरण, जिनसे आप परिचित हैं, निम्नलिखित हैं: \sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{15}, \pi, -\frac{\sqrt{2}}{\sqrt{3}}, 0.101101110..., इत्यादि। * इससे पहले कि हम \sqrt{2} को अपरिमेय संख्या सिद्ध करें, हमें निम्नलिखित प्रमेय की आवश्यकता पड़ेगी। [स्लाइड 23] (Background: White) प्रमेय 1.2 (Font Size: 40) प्रमेय 1.2 : मान लीजिए p एक अभाज्य संख्या है। यदि p, a^2 को विभाजित करती है, तो p, a को भी विभाजित करेगी, जहाँ a एक धनात्मक पूर्णांक है। उपपत्ति: * मान लीजिए a के अभाज्य गुणनखंडन निम्नलिखित रूप के हैं: a = p_1 p_2 ... p_n * जहाँ p_1, p_2, ..., p_n अभाज्य संख्याएँ हैं, परंतु आवश्यक रूप से भिन्न-भिन्न नहीं हैं। * अतः, a^2 = (p_1 p_2 ... p_n)(p_1 p_2 ... p_n) = p_1^2 p_2^2 ... p_n^2 [स्लाइड 24] (Background: White) प्रमेय 1.2 की उपपत्ति (जारी...) (Font Size: 40) * अब, हमें दिया है कि p, a^2 को विभाजित करती है। * इसलिए, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुसार; p, a^2 का एक अभाज्य गुणनखंड है। * परंतु अद्वितीयता के गुण का प्रयोग करने पर, हम पाएँगे कि a^2 के अभाज्य गुणनखंड केवल p_1, p_2, ..., p_n हैं। * इसलिए p को p_1, p_2, ..., p_n में से ही एक होना चाहिए। * अब, चूँकि a = p_1 p_2 ... p_n इसलिए p, a को विभाजित अवश्य करेगा। [स्लाइड 25] (Background: White) विरोधोक्ति द्वारा उपपत्ति (Proof by Contradiction) (Font Size: 40) * अब हम इसकी उपपत्ति दे सकते हैं कि \sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। * यह उपपत्ति उस तकनीक पर आधारित है जिसे 'विरोधोक्ति द्वारा उपपत्ति' (proof by contradiction) कहते हैं। प्रमेय 1.3: \sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। उपपत्ति: * हम इसके विपरीत यह मान लेते हैं कि \sqrt{2} एक परिमेय संख्या है। * अतः, हम दो पूर्णांक r और s ऐसे ज्ञात कर सकते हैं कि \sqrt{2} = \frac{r}{s} हो तथा s (\neq 0) हो। [स्लाइड 26] (Background: White) प्रमेय 1.3 की उपपत्ति (जारी...) (Font Size: 40) * मान लीजिए r और s में, 1 के अतिरिक्त, कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड है। * तब, हम इस उभयनिष्ठ गुणनखंड से r और s को विभाजित करके \sqrt{2} = \frac{a}{b} प्राप्त कर सकते हैं, जहाँ a और b सहअभाज्य (co-prime) हैं। * अतः b\sqrt{2} = a हुआ। * दोनों पक्षों का वर्ग करने तथा पुनर्व्यवस्थित करने पर, हमें प्राप्त होता है: 2b^2 = a^2 * अतः 2, a^2 को विभाजित करता है। * इसलिए प्रमेय 1.2 द्वारा 2, a को विभाजित करेगा। [स्लाइड 27] (Background: White) प्रमेय 1.3 की उपपत्ति (निष्कर्ष) (Font Size: 40) * अतः हम a = 2c लिख सकते हैं, जहाँ c कोई पूर्णांक है। * a का मान प्रतिस्थापित करने पर हमें 2b^2 = 4c^2 अर्थात् b^2 = 2c^2 प्राप्त होता है। * इसका अर्थ है कि 2, b^2 को विभाजित करता है और इसीलिए 2, b को भी विभाजित करेगा (प्रमेय 1.2 द्वारा)। * अतः a और b में कम से कम एक उभयनिष्ठ गुणनखंड 2 है। * परंतु इससे इस तथ्य का विरोधाभास प्राप्त होता है कि a और b में, 1 के अतिरिक्त, कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है (सहअभाज्य)। * यह विरोधाभास त्रुटिपूर्ण कल्पना के कारण प्राप्त हुआ है कि \sqrt{2} एक परिमेय संख्या है। * अतः, निष्कर्ष निकालते हैं कि \sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। [स्लाइड 28] (Background: White) उदाहरण 5 (Font Size: 40) प्रश्न: दर्शाइए कि \sqrt{3} एक अपरिमेय संख्या है। हल: * आइए हम इसके विपरीत यह मान लें कि \sqrt{3} एक परिमेय संख्या है। * अर्थात्, हम ऐसे दो पूर्णांक a और b (\neq 0) प्राप्त कर सकते हैं कि \sqrt{3} = \frac{a}{b} है। * यदि a और b में, 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड हो, तो हम भाग देकर a और b को सहअभाज्य बना सकते हैं। * अतः b\sqrt{3} = a है। * दोनों पक्षों का वर्ग करने तथा पुनर्व्यवस्थित करने पर, हमें 3b^2 = a^2 प्राप्त होता है। [स्लाइड 29] (Background: White) उदाहरण 5 (जारी...) (Font Size: 40) * अतः a^2, 3 से विभाजित है। इसलिए, प्रमेय 1.2 द्वारा 3, a को भी विभाजित करेगा। * अतः हम a = 3c लिख सकते हैं, जहाँ c एक पूर्णांक है। * a के इस मान को 3b^2 = a^2 में प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है: 3b^2 = 9c^2 अर्थात् b^2 = 3c^2 * इसका अर्थ है कि b^2, 3 से विभाजित हो जाता है। * इसलिए प्रमेय 1.2 द्वारा b भी 3 से विभाजित होगा। * अतः a और b में कम से कम एक उभयनिष्ठ गुणनखंड 3 है। [स्लाइड 30] (Background: White) उदाहरण 5 (निष्कर्ष) (Font Size: 40) * परंतु इससे इस तथ्य का विरोधाभास प्राप्त होता है कि a और b सहअभाज्य हैं। * हमें यह विरोधाभास अपनी त्रुटिपूर्ण कल्पना के कारण प्राप्त हुआ है कि \sqrt{3} एक परिमेय संख्या है। * अतः हम निष्कर्ष निकालते हैं कि \sqrt{3} एक अपरिमेय संख्या है। [स्लाइड 31] (Background: White) कुछ महत्वपूर्ण गुण (Font Size: 40) कक्षा IX में हमने बताया था कि: * एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का योग या अंतर एक अपरिमेय संख्या होती है। * एक शून्येतर परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल या भागफल एक अपरिमेय संख्या होती है। * यहाँ, हम उपरोक्त की कुछ विशिष्ट स्थितियाँ सिद्ध करेंगे। [स्लाइड 32] (Background: White) उदाहरण 6 (Font Size: 40) प्रश्न: दर्शाइए कि 5 - \sqrt{3} एक अपरिमेय संख्या है। हल: * आइए इसके विपरीत मान लें कि 5 - \sqrt{3} एक परिमेय संख्या है। * अर्थात् हम सहअभाज्य ऐसी संख्याएँ a और b (b \neq 0) ज्ञात कर सकते हैं कि: 5 - \sqrt{3} = \frac{a}{b} हो। * इस समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर हमें प्राप्त होता है: 5 - \frac{a}{b} = \sqrt{3} अतः \sqrt{3} = 5 - \frac{a}{b} [स्लाइड 33] (Background: White) उदाहरण 6 (निष्कर्ष) (Font Size: 40) * चूँकि a और b पूर्णांक हैं, इसलिए 5 - \frac{a}{b} एक परिमेय संख्या है। * अर्थात् इसके अनुसार \sqrt{3} एक परिमेय संख्या है। * परंतु इससे इस तथ्य का विरोधाभास प्राप्त होता है कि \sqrt{3} एक अपरिमेय संख्या है। * हमें यह विरोधाभास अपनी गलत कल्पना के कारण प्राप्त हुआ है कि 5 - \sqrt{3} एक परिमेय संख्या है। * अतः, हम निष्कर्ष निकालते हैं कि 5 - \sqrt{3} एक अपरिमेय संख्या है। [स्लाइड 34] (Background: White) उदाहरण 7 (Font Size: 40) प्रश्न: दर्शाइए कि 3\sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। हल: * आइए इसके विपरीत मान लें कि 3\sqrt{2} एक परिमेय संख्या है। * अर्थात् हम ऐसी सहअभाज्य संख्याएँ a और b (b \neq 0) ज्ञात कर सकते हैं कि: 3\sqrt{2} = \frac{a}{b} हो। * पुनर्व्यवस्थित करने पर, हमें \sqrt{2} = \frac{a}{3b} प्राप्त होगा। * चूँकि 3, a और b पूर्णांक हैं, इसलिए \frac{a}{3b} एक परिमेय संख्या होगी। [स्लाइड 35] (Background: White) उदाहरण 7 (निष्कर्ष) (Font Size: 40) * इसलिए इसके अनुसार \sqrt{2} भी एक परिमेय संख्या होगी। * परंतु इससे इस तथ्य का विरोधाभास प्राप्त होता है कि \sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। * अतः, हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि 3\sqrt{2} एक अपरिमेय संख्या है। [स्लाइड 36] (Background: White) प्रश्नावली 1.2 (Font Size: 40) * सिद्ध कीजिए कि \sqrt{5} एक अपरिमेय संख्या है। * सिद्ध कीजिए कि 3 + 2\sqrt{5} एक अपरिमेय संख्या है। * सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित संख्याएँ अपरिमेय हैं: (i) \frac{1}{\sqrt{2}} (ii) 7\sqrt{5} (iii) 6 + \sqrt{2} [स्लाइड 37] (Background: White) 1.4 सारांश (Font Size: 40) इस अध्याय में, आपने निम्नलिखित तथ्यों का अध्ययन किया है: * अंकगणित की आधारभूत प्रमेय: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है तथा यह गुणनखंडन अद्वितीय होता है, इस पर कोई ध्यान दिए बिना कि अभाज्य गुणनखंड किस क्रम में आ रहे हैं। * यदि p कोई अभाज्य संख्या है और p, a^2 को विभाजित करता है तो p, a को भी विभाजित करेगा, जहाँ a एक धनात्मक पूर्णांक है। * उपपत्ति कि \sqrt{2}, \sqrt{3} इत्यादि अपरिमेय संख्याएँ हैं। [स्लाइड 38] (Background: White) पाठकों के लिए विशेष (Font Size: 40) आपने देखा कि: * HCF(p, q, r) \times LCM(p, q, r) \neq p \times q \times r, जहाँ p, q, r धनात्मक पूर्णांक हैं। * जबकि निम्न परिणाम तीन संख्याओं p, q और r पर लागू होता है: LCM(p, q, r) = \frac{p \cdot q \cdot r \cdot HCF(p, q, r)}{HCF(p, q) \cdot HCF(q, r) \cdot HCF(p, r)} HCF(p, q, r) = \frac{p \cdot q \cdot r \cdot LCM(p, q, r)}{LCM(p, q) \cdot LCM(q, r) \cdot LCM(p, r)}

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